Saturday, May 5, 2012


UMMEED.....

by Preeti Bajpai on Tuesday, April 10, 2012 at 8:07pm ·

 
 
तमाम उम्र गुजार दी जिन्होंने दुआ में हाथ उठाने में 

आज उम्र के कर्जदार होकर जैसे खुशियाँ चुका रहे हो 
 
शाम दर शाम हर रात के ढलने की ख्वाहिश मन में पाले 

जैसे कितने ही रोज हुए हो न देखे हो सुबह के उजाले 
 
धुंध हुई जैसे ही कोई किसी ने कसकर पकड़े थे हाथ 

स्याह सी कोई आखों के नीचे सूखी नींद आसुओं के साथ 
 
 
अब जरा इंतज़ार में बैठे है के सुकून अभी है आने वाला 

हाथ मिलाकर गले लगाले शायद  है कुछ मिलने वाला 
 
अब ये समझाए भी तो कैसे की खटखटा के किस्मत को 

हाथ से बहुत जल्द जाने क्यों झाड़ देती है ये हिम्मत को.

.
पर उम्मीद अब भी कायम है ..और कायम  ही रहेगी तब तक 

इंसान बैठ नहीं जाता अपनी आखिरी बिस्तर पर जब तक..